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गुग्गल

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गुग्गल पूरी दुनिया में अपने नाम से ही प्रचलित है व प्रत्येक व्यक्ति इसे नाम से जानता ज़रूर है। इतनी मशहूर है तो गुणवान भी ज़रूर होगी पर गुग्गल नाम का तत्व नाममात्र मात्रा में मिलावट के साथ ही उपलब्ध हो पाता है व 80% खरीददारों पर नकली ही हाथ लगता है।

गुग्गल रेगिस्तान व अफगानिस्तान आदि स्थानों के कुदरती पेड़ों के गोंद के रूप में प्राप्त होता है व आयुर्वेदिक महर्षियों के कथनानुसार आयुर्वेद में 80 प्रकार के वात रोग कहे गए हैं। 80 के 80 प्रकार के रोगों को यदि कोई दूर करने की क्षमता रखता है तो वह एकमात्र गुग्गल है।

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गुग्गल पूरी दुनिया में अपने नाम से ही प्रचलित है व प्रत्येक व्यक्ति इसे नाम से जानता ज़रूर है। इतनी मशहूर है तो गुणवान भी ज़रूर होगी पर गुग्गल नाम का तत्व नाममात्र मात्रा में मिलावट के साथ ही उपलब्ध हो पाता है व 80% खरीददारों पर नकली ही हाथ लगता है।

गुग्गल रेगिस्तान व अफगानिस्तान आदि स्थानों के कुदरती पेड़ों के गोंद के रूप में प्राप्त होता है व आयुर्वेदिक महर्षियों के कथनानुसार आयुर्वेद में 80 प्रकार के वात रोग कहे गए हैं। 80 के 80 प्रकार के रोगों को यदि कोई दूर करने की क्षमता रखता है तो वह एकमात्र गुग्गल है।

भयंकर से भयंकर वात रोगों में, वायु विकारों में, नस-नाड़ी की समस्याओं में आयुर्वेदिक ऋषिगण हजारों सालों से इस दिव्य औषधि का उपयोग करते आ रहे हैं।

गुग्गल के बिना हवन सामग्री का बनना असम्भव है। दिमागी वात व्याधियों में जिसे भूत-बाधा आदि भी कहते हैं, सभी गृह-क्लेशों में, वायुमण्डल की अशुद्धियों में, वायुमण्डल में उपस्थित रोगाणुओं व जीवाणुओं को गोघृत के साथ धूनी करने पर, मानसिक रोगों की शान्ति में, अप्राकृतिक शक्तियों को दूर रखने में, सर्प आदि जीवों को भगा देने में गुग्गल की धूनी का तथा हवन का अहम स्थान है।

पर नकली पदार्थों से चन्द पैसों में तैयार होने वाली गुग्गल को धूप के पैकेट पर सिर्फ नाम के लिए ही उपलब्ध... है। हमारे विचार में हम सभी गुग्गल आदि सामग्रियों का प्रयोग कथित गुणों को पाने के लिए तो करते हैं व पण्डितों व गुरुजनों द्वारा गुग्गल व लोबान की धूनी के चर्चे भी अक्सर सुनते हैं, पर 100% नकली गुग्गल के प्रयोग होने के कारण इन हवन सामग्रियों व धूपों के लाभ हमें प्राप्त नहीं हो पाते।

हमारे भारत देश में जानवरों व मवेशियों को ठीक करने के लिए भी गुग्गल की धूनी को गौ-घृत के साथ प्रयोग करना आम मिसाल थी। अर्थात् गुग्गल की धूनी आदमियों का तो छोड़िए, बाल के बराबर हड्डियों को भी स्वस्थ कर देती है। यदि उत्तम किसी विधान से शुद्ध गुग्गल की औषधीय क्रिया करें पाएँ तो सैकड़ों रोगों पर कार्य करे।

सभी के हवन-पूजन-पाठ पूरे हों, यह भाव रखते हुए सभी को मानसिक-शारीरिक-आध्यात्मिक लाभ की प्राप्ति हो सके, इसी उद्देश्य के साथ निरंकार फर्म द्वारा यह शुद्ध गुग्गल को आप तक पहुँचाने का बीड़ा उठाया गया है।

लाभ:

  • वायुमण्डल का परम शोधक

  • मस्तिष्क वात व्याधि रोग विनाशक

  • अप्राकृतिक शक्तियों का वायुमण्डल से विनाश करने वाला

  • सर्प आदि जहरीले जीव-जन्तुओं को दूर रखने वाला

  • वायुमण्डल से जीवाणुओं व कीटाणुओं का पूर्णतः विनाश करने वाला

  • ध्यान की गहराइयों तक पहुँचाने वाली

  • मन के विचारों को शुद्ध करने वाली

  • हवन-अनुष्ठानों को पूर्ण करने वाली

  • फेफड़ों तथा चर्म रोगों को दूर करने वाली

  • त्वचा की विभिन्न समस्याओं में गुणकारी

  • 80 प्रकार के महावात रोग विनाशक

  • पशु चिकित्सा की बहुमूल्य औषधि

प्रयोग विधि:

  1. गाय के उपले पर गुग्गल व लोबान की थोड़ी-थोड़ी मात्रा डालकर गोघृत का प्रयोग करते हुए पूरे घर में धूनी को देना चाहिए।

  2. गाय के उपले के अभाव में Instant Huka coal या कोयले को आग में सुलगाकर या electric हवन सामग्री burner के माध्यम द्वारा शुद्ध गुग्गल लोबान का 100% लाभ उठा सकते हैं।

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गुग्गल पूरी दुनिया में अपने नाम से ही प्रचलित है व प्रत्येक व्यक्ति इसे नाम से जानता ज़रूर है। इतनी मशहूर है तो गुणवान भी ज़रूर होगी पर गुग्गल नाम का तत्व नाममात्र मात्रा में मिलावट के साथ ही उपलब्ध हो पाता है व 80% खरीददारों पर नकली ही हाथ लगता है।

गुग्गल रेगिस्तान व अफगानिस्तान आदि स्थानों के कुदरती पेड़ों के गोंद के रूप में प्राप्त होता है व आयुर्वेदिक महर्षियों के कथनानुसार आयुर्वेद में 80 प्रकार के वात रोग कहे गए हैं। 80 के 80 प्रकार के रोगों को यदि कोई दूर करने की क्षमता रखता है तो वह एकमात्र गुग्गल है।

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